Sunday, January 3, 2010

कि थोड़ी भी न पिया करो!!!

जय हिंद !
नीचे मेरे कुछ सवाल है जिनको लेकर अत्यंत बेचैन और उदाश था कि,आखिर कैसे,क्या करू की लोगो से शराब  छुड़ा सकू?
क्या नेता जी से बात करू?नहीं नहीं सरकार भला क्यों बंद करेगी?उसे तो टैक्स मिलता है,आबकारी विभाग के भविष्य का क्या होगा?
स्कूल,कॉलेज जा-जा के समझाने का वक़्त नहीं मिलेगा,लाचार होकर बैठा था की,युवा दिलो के अज़ीज़ "ब्लॉगर " पर नज़र पड़ी,ऐसा लगा की मनो डूबते को सहारा मिल गया|
अगर संभव हो सके तो हिंदुस्तान को बर्बाद होने से बचा लीजिये,क्योंकि अगर शराब सहारा देती तो,इसको पीने के बाद लोग लड़खड़ाते नहीं|
जब जब मैं किसी मैखाने के पास से गुजरता हूँ तो एक सवाल जेहन में जरुर  आता है,की आखिर लोग शराब पीते क्यों है?क्या मिलता है इसे पीने से?एक अजीब सी ख़ामोशी  और मद्धिम सी रौशनी बिखरी रहती है|मयखाने के काफी चक्कर लगाने के बाद मैं मुख्य तीन  कारणों पे पंहुचा हूँ,जो की निम्नलिखित है-
प्रथम भौतिक कारण,द्वितीय सामाजिक कारण और आखिरी में मनोवैज्ञानिक कारण|
प्राचीन कल से लेकर आज तक चिकित्सा पद्धति में इसका प्रयोग दर्द चोट मोच आदि से लेकर अत्यंत जटिल चिकित्सा में होता आ रहा  है|जब भी किसी को चोट लग जाती थी तो थोड़ी सी शराब मालिश कर दी जाती थी|
आयुर्वेद से लेकर सभी अत्याधुनिक चिकित्सा में इसका प्रयोग सर्वविदित है|
अब जरा सामाजिक कारणों को जानने की चेष्टा करते है|शायद आपको याद होगा फिल्म "मंगल पाण्डेय" का वो दृश्य ,जब एक मजबूर भारतीय नारी ,अँगरेज़ औरत के बच्चे को स्तनपान करा देने के बाद अपने भूखे बच्चे को नशे की दवा  दे के सुला देती है|वैसे अभी भी जब की सरकार तमाम दावे कर ले कई ऐसे भी पिछड़े और अनपढ़   इलाके मौजूद है जहा की,लोग खुलेआम शराब बनाते और,परिवार समेत सेवन करते पाए जा सकते है|
बात यही ख़त्म नहीं होती,बहुत से समाज और विरादारियां इसको अपने शानो शौकत की पहचान बताते है,और खूब बढ़ावा भी देते है|
अब बात करते है,मनोवाज्ञानिक कारणों की|
कल मैं दिल्ली की सडको पे ऐसे ही घूम रहा था की दो स्कूली छात्र यही,कोई १८/२० साल की उम्र होगी,नशे में डगमगाते हुए आते दिखाई पड़े|
उनमे से एक ने शेर बोला "कभी लहरा के पी गया,कभी बल खा के पी गया
यारो की महफ़िल में जाम उठा के पी गया,यु तो न थी पीने की तमन्ना मेरी,
जब मुझ पर रोने लगी शराब तो तरस खा के पी गया "
अनजाने में मेरे मुह से वाह-वाह निकल गया,लड़का मेरी तरफ मुखातिब हुआ और,प्रश्नवाचक चिन्ह की तरह मुह करके खड़ा हो गया|जैसे की एक अनकहा सवाल हो उसकी जुबान पर........
मैंने पूछ लिया कि  क्यों पीते हो शराब?कुछ देर तक खामोश रहने के बाद उसने अपनी प्रेम कहानी बताई|
आप कहानी छोड़ दे,जान कर भी क्या कर लेंगे?
मैंने पूछा कि क्या शराब पीने से तुम्हारा दर्द कम हो जायेगा?
उसका जवाब था,"जनाब ये बचे के कच्छे की तरह है,जोकि मुशिबतो को मिटा नहीं सकती,लेकिन जिंदगी आसन कर देगी  "
मैं बेजुबान हो गया,अब शायद कोई सवाल बाकी न था|
लड़के चलते चलते,दूर अँधेरे में गुम हो गए,हा उनकी आवाज़  में कुछ गाने सुनाई देते रहे........दिल जब से टूट गया.......तब से सनम.........मुझे पीने का शौक नहीं............|
लेकिन उनका तर्क कहे या कुतर्क मेरे सिने को भेद  कर गया|क्या यही है हमारी पीढ़ी का भविष्य ???
अभी मैं मयखाने की ओर चलता हूँ,और भी कारणों और इलाज़  की खोज में,क्योंकि बिना अस्पताल गए आप मरीज़ का हाल नहीं जान सकते !!!!!
किसी भी त्रुटी के लिए छमा प्रार्थी हूँ|
आपका,

अमरेश पाण्डेय "सिद्धांत" 

1 comment:

  1. wah janaab wah likhte badiya ho
    waise
    kis daaru ki company ne kal tumhe kharaab daaru de di jo us ki buraayi kar rahe ho
    tyaar jeo or jeene do cheers 4 d life
    njoy......

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